Cybar Express

Newsportal

चोरी के शक में युवक को मारते मारते मार डाला और खाकी को कानो कान नही हुई खबर

मित्र पुलिस के रूप में फेल खाकी लोगों के बीच खाकी का खौफ नहीं हो रहा खत्म

हरिओम की हत्या!भीड़ की बर्बरता या खाकी की लापरवाही…?


रायबरेली। कप्तान रायबरेली की बेहतरीन पुलिसिंग की गूंज लगातार सुनाई देती है। अपराध नियंत्रण और गौकशो,गैंगस्टर,लुटेरों पर सिकंजा कसने की मिसाले पेश की जाती रही हैं। लेकिन इसी बीच ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत चोरी के शक में हत्या जैसी सनसनीखेज वारदात ने ऊंचाहार की खाकी पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। कि कप्तान रायबरेली के सख्त निर्देशों के बावजूद ऊंचाहार की खाकी ने कानून-व्यवस्था को ही सवालों के घेरे में लाकर खडा कर दिए है। एक ओर कप्तान लगातार अपराध नियंत्रण के लिए सख्त निर्देश जारी कर रहे हैं, कई जगहों पर सुधार भी दिखाई दे रहा है, लेकिन ऊंचाहार का हाल देखने के बाद साफ होता है कि निचले स्तर पर खाकी की पकड़ कमजोर पड़ गई है। यही कारण है कि एक ओर भीड़ की बर्बरता से हरिओम की जान चली जाती है और दूसरी ओर चोरी-डकैती व ड्रोन की गुत्थी ने लोगों की नींद हराम कर दी है। दरअसल 2 अक्टूबर को ऊंचाहार थाना क्षेत्र के ईश्वरदासपुर हॉल्ट के पास रेलवे ट्रैक किनारे हरिओम का शव बरामद हुआ। मृतक की शिनाख्त फतेहपुर जनपद निवासी हरिओम के रूप में हुई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से स्पष्ट होता है कि चोरी के शक में ग्रामीणों ने उसे बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला। सबसे अहम बात यह भी है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि फतेहपुर निवासी हरिओम ऊंचाहार आखिर क्यों, कैसे और किसके यहां पहुंचा था। यह सवाल अब भी अनुत्तरित है जो जांचोपरांत समय के साथ ही स्पष्ट हो पाना सम्भव है…

खैर पुलिस ने अपराध संख्या 389/25 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर छह अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस की मौजूदगी और चौकसी इतनी कमजोर क्यों रही कि ग्रामीण कानून हाथ में ले बैठे……?

क्या पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र इतने नाकाम हैं कि निर्दोष या आरोपी का फैसला अब भीड़ करेगी……?

हरिओम की दर्दनाक मौत सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था पर करारा तमाचा है। इतना ही नही ऊंचाहार क्षेत्र में बीते दिनों चोरी की वारदातें इस कदर बढ़ी हैं कि लोगों का खाकी पर भरोसा डगमगा गया है। खैर थाना क्षेत्र में इतनी बड़ी वारदात होने पर भी गश्त और सुरक्षा इंतजाम नाकाम क्यों साबित हुए….?

क्या खाकी महज घटनाओं के बाद औपचारिक कार्रवाई करने तक सीमित रह गई है……?

सवाल ये भी है कि आखिर खाकी से दूरी क्यों बना रहे लोग…..?

 

ग्रामीणों में डर का आलम यह है कि वे खाकी को सूचना देने से भी कतराते हैं। वजह साफ है खाकी का लहजा और ताबड़तोड़ धमक के साथ सवाल-जवाब करने का तरीका कही ना कही जिसके चलते हरिओम को जान से हाथ धोना पडा….

चोरी के शक मात्र से लोग उसे मारते मारते मार डाले और खाकी को कानो कान कोई खबर नही हुई एक बडी आबादी में ना किसी कि हिम्मत हुई ना खाकी के खबरी काम आए कि जब युवक को पकडा गया तो कोई खाकी को सूचना तक दे सके, ना हीं खाकी की खुफिया तंत्र काम आए….क्या थाने की खाकी आम जनमानस में भी आपसी सामंजस बनाने में नाकाम है…?

ऐसे में अपराध की रोकथाम कैसे होगी,जब लोग ही खाकी के खौफ से दूरी बना लेंगे….?

वैसे उच्चाधिकारियों के द्वारा लगातार कितने ही आदेश,निर्देश और सख्ती क्यों न हो,अगर थाना स्तर पर कार्यशैली ढीली है तो जनता तक भरोसे का संदेश नहीं पहुंच पाता। ऊंचाहार में हो रही वारदाते इस बात की गवाही हैं कि नीचे स्तर पर खाकी को अपने रवैये और कार्यशैली में बड़ा बदलाव करना होगा। हरिओम की दर्दनाक मौत व ऊंचाहार में सिलसिलेवार तरीके से हो रही चोरियों ने स्पष्ट कर दिया है कि खाकी को अब केवल औपचारिक कार्रवाई से आगे बढ़कर जनता का विश्वास जीतना होगा। कप्तान रायबरेली की सख्ती तभी रंग लाएगी जब थाने के स्तर पर पुलिस न सिर्फ सजग होगी बल्कि जनता के बीच भरोसा भी कायम करेगी।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed