पत्नी-पिता की चीखें और मासूम बेटी के सर से छत छीनने का जिम्मेदार कौन….?
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क्या सच में दूर खडी रही पीआरवी देखती रही तमाशा या सोती रही खाकी
रायबरेली। ऊंचाहार थाना क्षेत्र में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। ससुराल जा रहे फतेहपुर जिले के हरिओम को ग्रामीणों ने चोर समझकर पकड़ लिया और बेल्ट-डंडों से इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी सांसें थम गईं। सिर्फ चोरी के शक मात्र से रात में खंभे से बांधकर मारते-मारते उसकी जान ले ली गई। गुरुवार सुबह ईश्वरदासपुर रेलवे स्टेशन के पास उसका शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। वही मौत से पहले की दिल दहला देने वाला वीडियो वायरल हुआ हर ओर लोग सहम गए जंगलीपन का वो नजारा देखकर वायरल वीडियो ने हर किसी की रूह कंपा दी। वीडियो में हरिओम को पहले खंभे से बांधकर पीटा गया, फिर कपड़े उतरवाकर जमीन पर पटक दिया गया। एक आरोपी उसके गले पर पैर रखे था, जबकि दूसरे उसके हाथ-पैर फैलाकर बर्बरता से डंडे और बेल्ट बरसा रहे थे। हरिओम बदहवास हालत में कभी अपनी मां को पुकार रहा था तो कभी “राहुल गांधी” को आवाज लगा रहा था, लेकिन किसी ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की।
➡️पत्नी और पिता का दर्द! सब बेचकर इलाज कराया…
मृतक हरिओम की परिवार चलाने हेतु ऊंचाहार में एनटीपीसी के एक बैंक में बतौर स्वच्छता कार्यकत्री कार्यरत है। खबर मिलते ही वह फोटो देखकर पति की पहचान करते ही बेसुध हो गई। 11 साल की बेटी अनन्या अब पिता की लाश देखकर सवालों से घिरी है कि आखिर उसका दोष क्या था। पिता गंगादीन फफकते हुए बोले “बेटे की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। इलाज कराने में हमने सब बेच दिया…
अब बेटा भी चला गया। किसी का क्या बिगाड़ा था उसने….?
शक के आधार पर ऐसे मार डालना कहां का इंसाफ है…..?
➡️खाकी की कार्रवाई पांच आरोपी गिरफ्तार, बेल्ट-डंडे हुए बरामद
रायबरेली पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई का दावा किया है। थाना ऊंचाहार पुलिस ने दो नामजद और तीन अन्य आरोपियों वैभव सिंह, विपिन मौर्या, विजय कुमार, सहदेव पासी और सुरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से दो बेल्ट, एक डंडा, एक शर्ट और बनियान भी बरामद किए गए। सभी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है। हालांकि, इस वारदात ने पुलिस की मौजूदगी और कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगो मे चर्चाएं हैं कि जिस जगह हरिओम को पीटा जा रहा था, वहां से महज़ 500 मीटर की दूरी पर पुलिस की गश्ती टीम और पीआरवी मौजूद थी। इसके बावजूद न तो किसी ने हस्तक्षेप किया और न ही युवक की जान बचाई। सवाल यह भी है कि आखिर देर रात गश्ती दल होते हुए भी भीड़ को इतनी देर तक मनमानी करने की छूट किसने दी…..? क्या सिर्फ कोतवाल का तबादला काफी है क्या सिर्फ कोतवाल की थी लापरवाही….? घटना के बाद ऊंचाहार कोतवाल का तबादला कर दिया गया है, लेकिन क्या यह पर्याप्त कार्रवाई है….? जिम्मेदारी तो हल्का दारोगा, बीट सिपाहियों और खासकर उन पीआरवी पुलिसकर्मियों की भी बनती है, जिन्होंने चंद कदम दूर से यह सब होने दिया। ऐसे में यह तबादला महज औपचारिकता नजर आता है। वायरल वीडियो में दिख रहे दरिंदो समेत लापरवाही बरतने वाले खाकीधारियों पर भी सख्त विभागीय कार्रवाई पीड़ित परिवार के लिए न्याय की पहली सीढ़ी हो सकती है। यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि हमारे समाज और सिस्टम पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। एक तरफ हरिओम की पत्नी और बेटी अब जिंदगीभर के संघर्ष के बोझ तले दब गई हैं, दूसरी तरफ यह वारदात बता रही है कि अफवाह और भीड़ किस तरह कानून को अपने हाथ में लेकर इंसानियत को शर्मसार कर देती है। सवाल उठता है कि क्या दोषियों की गिरफ्तारी और कोतवाल का तबादला भर से न्याय पूरा हो जाएगा….?