जिला कारागार में व्याप्त भ्रष्टाचार और बंदियों के शोषण की मुख्यमंत्री से दोबारा शिकायत
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जिला कारागार में व्याप्त भ्रष्टाचार और बंदियों के शोषण की मुख्यमंत्री से दोबारा शिकायत
-भारतीय हिंदू सेवा संस्था के प्रदेश अध्यक्ष ने दो माह पहले भी की थी शिकायत, नहीं हुई अभी तक कोई कार्यवाही
आगरा। महानगर के जिला कारागार में व्याप्त भ्रष्टाचार और बंदियों का मानसिक शारीरिक एवं आर्थिक शोषण व उत्पीड़न के साथ जेल नियमावली को धता बताते हुए तमाम अनियमिततायें किए जाने के सम्बंध में भारतीय हिंदू सेवा संस्था के प्रदेश अध्यक्ष मनोज अग्रवाल द्वारा की गयी शिकायत के लगभग दो माह बाद भी कोई कार्रवाई न की गई है। इस पर उन्होंने फिर से मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाने के लिए इस मामले में एक शिकायती पत्र उनको प्रेषित किया है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि मेरे (मनोज अग्रवाल) द्वारा दिनांक 21 मार्च 2025 को भेजे गए आपको (मुख्यमंत्री) शिकायती पत्र में आगरा के जिला कारागार में भ्रष्टाचार, बंदियों के मानसिक, शारीरिक व आर्थिक शोषण और जेल मैनुअल को धताबता कर मनमानी करते हुए तमाम अनियमिततायें भेजा गया था। लेकिन करीब दो माह का समय होने को आ रहा है संबंधित विभाग द्वारा गंभीर शिकायतों का न तो कोई निस्तारण कर आख्या भेजी गयी और न ही दोषी विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवायी के आदेश पारित हो पाए। आश्चर्य जनक बात तो यह है कि एक ओर तो आपके विशेष सचिव बृजेश सिंह दिनांक 15 अप्रैल 2025 को प्रमुख सचिव कारागार को कार्यवाही करने को आदेशित किया गया वहीं उन्हीके द्वारा 15 अप्रैल 2025 को मुझे (शिकायतकर्ता) को प्रेषित पत्र में आगरा के जिला कारागार की सभी समस्याओं को शासन स्तर से निस्तारण करना बता दिया गया। एक ही दिन (15 अप्रैल 2025) नियमानुसार कार्यवाही और जांच आख्या के आदेश दिए गए समस्या निस्तारित भी कर दी गयी। यह भी विशेष जांच का गंभीर विषय है।
मनोज अग्रवाल ने शिकायती पत्र में लिखा है कि जिला कारागार में वर्तमान में जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा एवं जेलर विजय कुमार गौतम सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बदौलत भ्रष्टाचार की जड़ें बरगद का पेड़ बन गई है। जेल में आने वाले नए बंदीयों का किस प्रकार आर्थिक मानसिक और शारीरिक शोषण किया जा रहा है इसकी जानकारी जमानत पर बाहर आए एक भुक्तभोगी ने बताई जो रोंगटे खड़े करने वाली है। किसी मामले में बंदी का जेल में प्रवेश होते ही मशक्कत सहित अन्य कई मामलों को लेकर आर्थिक उत्पीड़न शुरू हो जाता है। यह अवैध कार्य बैरिट, गुमटी और कैंटीन के रायटर, पीलिया के साहब सिपाही आदि कर्मचारियों द्वारा अलग-अलग स्तर पर किया जाता है। मशक्कत कटवाने से शुरुआत होती है। बंदी की हैसियत का अंदाजा लगाकर मशक्कत कटवाने की फीस ₹6000 से लेकर कई लाख रुपए तक पहुंच जाती है। इस वसूली के बाद ही बंदी की मशक्कत काटी जाती है। जब तक मशक्कत नहीं कटती बंदीयों के साथ हद दर्जे का अत्याचार किया जाता है, जिसमें मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न भी शामिल होता है। मनोज अग्रवाल ने पत्र में और भी कई बातों का बिंदुवार खुलासा किया है।
प्रदेश अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पत्र के माध्यम से मांग की है कि इस पत्र के साथ संलग्न सभी संबधित दस्तावेज (पूर्व में भेजे गए शिकायती पत्र और उस पर हुई विभागीय जांच के आदेश) का पुनः अवलोकन करते हुए उक्त मामले को गंभीरता से लेंगे और आगरा के जिला कारागार में बेखौफ व्याप्त गलत व विभागीय नियमानुसार के विपरीत हो रही गलत गतिविधियों, भ्रष्टाचार और बंदियों के शोषण आदि अवैध कार्यों एवं जेल मैनुअल को धता बताने किसी निष्पक्ष एजेंसी अथवा शासन स्तर की कमेटी से इसके लिए दोषी विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके गुर्गों (पीलीया कैदी) को भी चिन्हित किया जा सकेगा। ताकि उनके विरूद्ध विभागीय एवं विधिक कार्यवाही कर सख्त सनक दिखाया जाये जिसका सकारात्मक संदेश जनपदों के अन्य कारागार प्रबंध पत्र तक पहुंचे।