ऊंचाहार की वारदात से सबक न लेने वाली सलोन पुलिस पर फिर उठे सवाल, कोतवाल सलोन ने फोन तक उठाना नहीं समझा जरूरी
रायबरेली। बीते दिन ऊंचाहार में हुई भीड़तंत्र की बर्बर हत्या के बाद भी पुलिस प्रशासन ने शायद कोई सबक नहीं लिया। अब सलोन क्षेत्र के जौदह गांव से इंसानियत को शर्मसार करने वाली नई तस्वीरें सामने आई हैं। देर रात ग्रामीणों ने चोरी के शक में तीन लोगों को पकड़कर बेरहमी से पीटा। पिटाई इतनी निर्मम थी कि एक युवक मौत और जिंदगी से जूझ रहा है।घटना के बाद का खून से लथपथ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। वायरल फुटेज में एक टूटा हुआ हथियार भी दिखाई दे रहा है, जो भीड़ की क्रूरता को दर्शाता है….पुलिस की खामोशी, कोतवाल की गैरजिम्मेदारी भी स्पष्ट नजर आई इस गंभीर मामले पर जब मीडिया ने बार-बार कोतवाल सलोन से संपर्क साधने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा, बल्कि वापस कॉल भी नहीं किया। उनकी यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है,क्या पुलिस अब भीड़ की हिंसा को नजरअंदाज करने की आदत डाल चुकी है…..? क्या वर्दीधारी केवल तब हरकत में आते हैं जब मामला सोशल मीडिया और अफसरों तक पहुंच जाए….? अगर कोतवाल ही जवाबदेही से बचेंगे तो कानून-व्यवस्था की हिफाजत व चीजे कौन स्पष्ट करेगा….? ऊंचाहार का ताजा सबक कैसे भूल सकता है प्रशासन…? कुछ ही दिन पहले ऊंचाहार में फतेहपुर निवासी हरिओम की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। उस कांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया और पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। मीडिया में मामला हाइलाइट होने पर कोतवाल का तबादला हो गया लेकिन सवाल यह है कि जब ऊंचाहार की घटना ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया था तो फिर सलोन पुलिस उसी पुरानी लापरवाही पर क्यों कायम है…..? भीड़ का हौसला, पुलिस की ढिलाई,आखिर लोगो को यह हिम्मत कहां से मिल रही है कि वे कानून को हाथ में लेकर इंसाफ करने लगें…? क्या सलोन पुलिस ऊंचाहार जैसी नई त्रासदी का इंतजार कर रही है….? सलोन की यह घटना सिर्फ एक वारदात नहीं, बल्कि प्रशासन की ढिलाई और पुलिस की नाकामी का आईना है। भीड़तंत्र अगर ऐसे ही हावी होता रहा तो रायबरेली में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह जाएगी। आखिरकार थानेदार अपनी जिम्मेदारियां व उच्च अधिकारियों के निर्देशों का पालन करते हुए कब अपने थाना क्षेत्र में कठोरता से कानून राज स्थापित कर पाएंगे।